मेरी वाणी को सुन पापी तड़पेगा
अन्दर से मरकर बाहर से भड़केगा.
पर मैं क्यूँकर उनसे डरने वाला हूँ.
मैं कलम छोड़कर न भगने वाला हूँ."
दो आशी माता! कलम सत्य ही बोले
बेशक कषाय कटु तिक्त सदा ही बोले.
अन्दर से मरकर बाहर से भड़केगा.
पर मैं क्यूँकर उनसे डरने वाला हूँ.
मैं कलम छोड़कर न भगने वाला हूँ."
दो आशी माता! कलम सत्य ही बोले
बेशक कषाय कटु तिक्त सदा ही बोले.
बड़ी मुददत से तेरे इन्तेजार मे बैठा हु |
ReplyDeleteतू क्या जाने कितना बेक़रार मै बैठा हु ||
हजार गम हजार मुश्किले ,
बेरहम वकत कुदगर्ज नसीहते,
न मुनासिब बया करना न मुमकिन सिसकना ,
फिर भी लबो पे मुस्कराहट सजाये बैठा हु |
बड़ी मुददत से तेरे इन्तेजार मे बैठा हु |
अश्क जो तेरी याद मे निकल आया ,
रुक्सार से न गुजरने दिया,
जो जो वादे थे तुजसे ,
दिल को न उनसे मुकरने दिया ,
सपनो के सीस महल मे फिर पत्थर लिये बैठा हु |
बड़ी मुददत से तेरे इन्तेजार मे बैठा हु |
खुवएसो की जिदे , खुवाबो के ताने ,
कर जाते है जलील ये बहारो के फ़साने ,
बहुत मुस्किल होता है बहलाना ,
हर दफा हर बार सिर्फ उम्मीद के बहाने,
आज फही रुसवा हुआ हु , आज फिर बेआबरू बैठा हु |
बड़ी मुददत से तेरे इन्तेजार मे बैठा हु |