कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है मै तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है की मोह्हबत एक एहसासों की पवन सी कहानी है कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आखों में आंसू है जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता मेरी चाहता को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा हमारे दिल में कोई खवाब पल बैठा तो हंगामा अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्हबत का मै किस्से को हकीकत में बादल बैठा तो हंगामा . |
Wednesday, March 11, 2020
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है --Kumar Vishwas
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